फिर भी सूखा है रामगढ़ बाँध

जयपुर नगर से 30 किलोमीटर पूर्व दिशा में तत्कालीन महाराजा माधोसिंह द्वितीय ने 30 दिसम्बर, 1897 में रामगढ़ बांध का कार्य आरम्भ करवाया था। निर्माण कार्य वर्ष 1902 में पूर्ण होने पर बांध पानी से लबालब हुआ और इसका पानी सिंचाई के लिए एक बड़ी नहर से दौसा तक बनाई गई थी। इसके बाद ही इसकी छोटी-छोटी सहायक नहरे भी बनाई गई थी। जिससे अनेक निकटवर्ती ग्रामों की खेती की जमीन की सिंचाई होने लगी।


जयपुर की बढ़ती जनसंख्या के कारण जनता की प्यास बुझाने के लिए रामगढ़ बांध पर एक बड़ा पम्प हाऊस बना कर 17 इंच की पाइप लाइन के द्वारा वर्तमान खोले के हनुमान मंदिर के पास स्थित लक्ष्मण डूंगरी पर पानी पहुंचा कर फिल्टर कर जयपुर शहर की प्यास बुझाने का कार्य किया गया। जो लगभग 70-75 वर्षों तक जयपुर निवासियों की प्यास बुझाता रहा। रामगढ़ बांध अपने समय का एक विशाल बांध है जिसकी ऊंचाई 60 फीट है जिसे पानी की भारी आवक को देख कर 65 फीट कर दी गई। इसके पानी के निकास के लिए 15 फुट चौड़े और 16.5 फुट ऊंचे छह मोरी गेट बने हुये है। जिनके द्वारा सिंचाई के लिए पानी खोला जाता था। अधिक पानी आने पर इनको खोलकर पानी का निकास किया जाता था।


वर्ष 1981 में बांध में 64.5 फीट तक पानी आया था और 1982 में ऐशियन गेम्स की नौकायन प्रतियोगिता इस बांध में आयोजित हुई थी, जो जयपुर शहर के इस रामगढ़ बांध का एतिहासिक क्षण थ। आज बांध की पाल पर पहुंचने पर दूर-दूर तक पानी के स्थान पर जंगली बबूल व झाड़-झंकाड़ नजर आते हैं। जहां कभी दूर-दूर तक पानी ही पानी नजर आता था। यह कृत्य हुआ राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, पंचायत, सिंचाई विभाग, वन विभाग सहित प्रशासनिक स्तर के विभागों की अनदेखी के कारण। विभागों ने बिना सोचे समझे रामगढ़ बांध के केचमेण्ड एरिया में एनिकट बनाने, बहाव क्षेत्र में जमीन एलामेंट करने के कारण आज रामगढ़ बांध की मुख्य बाण गंगा नदी के साथ-साथ उसकी बड़ी सहायक नदी अचरोल, मनोहरपुर, शाहपुरा, घुघल्या नाला, राजपुर नाला, चक नाला में एनिकट, फार्म हाऊस, रिसोर्ट बने हुये है।

उच्च न्यायालय की मॉनिटिरिंग कमेटी के बाद छोटे-बड़े एनिकट तो हटाये गये हैं, पर सिंचाई विभाग ने मात्र खानापूर्ती ही की है। साथ ही रसूखदारों के फार्म हाऊस, होटल, रिसोर्ट, अचरोल, ताला नदी, राजपुरवास, ताला नाला, निम्स युनिर्वसिटी के पास घुघल्या नाला में आज भी पानी का आवक को रोके रखे हुए है। इसके कारण आज इस बांध का मूल स्वरूप छिन्न-भिन्न हो चुका है। अत: रामगढ़ बांध को बचाने के लिए एवं उसी पूर्णक्षमता से भरने के लिए कैचमेट एरिया में किये गए रूकावट को हटाने बिना कठिन हीं नहीं असम्भव है।


तत्कालीन शासकों की सोच का अनूठा उदाहरण एक लेख के अनुसार रामगढ़ बांध के कैचमेन्ट एरिया की मुख्य सहायक नदी अचरोल के तत्कालीन ठाकुर हरिसिंह ने 1938 ई. के अकाल में तत्कालीन अंग्रेज, प्रधानमंत्री सर बीघम सेन्ट जॉन के सुझाव पर अचरोल नदी पर बांध बनवाना चाहते थे और इस सम्बन्ध में उन्होंने अपनी तजवीज रवन्यू मिनिस्टर खान बहादुर मिंया अब्दुल अजीज को लिख भेजी थी। यह तजवीज तकनीकी कारणों से स्वीकार नहीं करते हुए रेवन्यू मिनिस्टर ने लिखा कि जहां यह बांध बनाने का सुझाव दिया है, वह रामगढ़ बांध में साढ़े अ_ाइस वर्गमील में पहाड़ी जलग्रहण क्षेत्र में आता है और ये बांध बनने से रामगढ़ बांध में पानी की आवक प्रभावित होगी।

Anupan Setia

-Anupam Sethia (freelance writer)

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